Thursday, 20 October 2016

थूक दिया और सोचा नहीं !


थूक दिया और सोचा नहीं,
हम गरम खून हैं, परवाह नहीं,
इस हाथ ने झाड़ू देखी नहीं,
धरती ही तो है, माता नहीं |

इस सोच के साथ जो बड़े हुए,
कुछ लोग अभी तक अड़े हुए,
गन्दा होना तो है ही इसको,
धरती ही तो है, माता नहीं|

अपने घर को खालिस रखेंगे,
और बाहर कूड़ा फेकेंगे,
धरती तो सब निगल ही लेगी,
फ़ेंक दो चलो, ये क्या बोलेगी?

एक दिन सब उगलेगी धरती,
अब तक थी जो सहा सब करती,
तेरा कूड़ा तेरे ऊपर,मुंह फेर कर आएगा,
उस गन्दगी के बोझ तले, तू अवाक रह जायेगा|

अभी समय है सुधरने का,
अब न बिगाड़ करने का,
सीने में जिसके शूल गए,
उसे याद करो जिसे भूल गए|

उठा झाड़ू इसे करो साफ़,
शायद कर दे वो गलती माफ,
बच्चो को माफ करना आता ही है |
ये धरती जो है, माता ही है |



-    प्रीति सिंह की कलम से |
(स्वच्छता दिवस के उपलक्ष पर )

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